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गुजरात में एक स्कूल वैन ड्राइवर के बेटे मुस्तफा ने मिसाल पेश की है। मुस्तफा ने यह साबित किया है कि अगर मुस्लिम समाज में काबिलियत की कोई कमी नहीं है। बशर्ते उन्हें आगे बढ़ने के ईमानदारी के साथ एक मौका दिया जाए। दरअसल मुस्तफा ने द इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया के फाउंडेशन (आईसीएसआई) प्रोग्राम की परीक्षा में पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है। मुस्तफा ने 400 में 365 अंक हासिल करके ये मुकाम हासिल किया है। बता दें कि आईसीएसआई ने पिछले महीने फाउंडेशन प्रोग्राम की परीक्षा आयोजित की थी।
मुस्तफा के पिता मुफद्दल बताते हैं मुस्तफा बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज था। पढ़ाई के लिए उस पर कभी दबाव नहीं डाला गया। वह सीएस बनना चाहता था। मुस्तफा के पिता बताते हैं कि सीएस बनना उसका सपना था और इसे पूरा करने के लिए कभी उसे रोका नहीं गया। मुस्तफा का सपना सीएस बनकर कॉर्पोरेट कंपनी में जॉब करना हैं।
मुस्तफा के पिता मुफद्दल बताते हैं मुस्तफा बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज था। पढ़ाई के लिए उस पर कभी दबाव नहीं डाला गया। वह सीएस बनना चाहता था। मुस्तफा के पिता बताते हैं कि सीएस बनना उसका सपना था और इसे पूरा करने के लिए कभी उसे रोका नहीं गया। मुस्तफा का सपना सीएस बनकर कॉर्पोरेट कंपनी में जॉब करना हैं।
वे बताते हैं कि मुझे उम्मीद नहीं थी कि देश में पहला स्थान हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि मुझे टॉप-10 में आने की उम्मीद थी। वो कहते हैं कि नौकरी लगने के बाद पिता को नौकरी छोड़ने को कहूंगा क्योंकि उन्होंने घर के लिए और खासकर मेरे लिए काफी मेहनत किया है।
हालाँकि, हमारे देश में हिंदुस्तानी मुसलमानों को एक अलग ही नजर से देखा जाता है लेकिन इतिहास गवाह है कि, जब भी इस देश के लिए जरुरत पड़ी है तो हिंदू भाइयों के साथ-साथ मुस्लिम भाइयों ने भी इस देश की तरक्की में अपना पूरा-पूरा योगदान दिया है और इसे खुले तौर पर नकारा नहीं जा सकता हैं
हालाँकि, हमारे देश में हिंदुस्तानी मुसलमानों को एक अलग ही नजर से देखा जाता है लेकिन इतिहास गवाह है कि, जब भी इस देश के लिए जरुरत पड़ी है तो हिंदू भाइयों के साथ-साथ मुस्लिम भाइयों ने भी इस देश की तरक्की में अपना पूरा-पूरा योगदान दिया है और इसे खुले तौर पर नकारा नहीं जा सकता हैं
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